किसानों को राहत:सरकार ने खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया, तिल की MSP 523 रु., तुअर और उड़द दाल की 300 रु. बढ़ी

कोरोना महामारी के दौरान लगातार तीसरे साल सरकार ने खरीफ की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाया है। कैबिनेट की बैठक में खरीफ की 14 फसलों की 17 वैरायटियो की नई MSP को मंजूरी दे दी। तिल की MSP 523 रु., तुअर और उड़द दाल की 300 रुपए बढ़ाई गई है। धान (सामान्य) की MSP पिछले साल के 1,940 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,040 रुपए प्रति क्विंटल की गई है यानी 100 रुपए ज्यादा। MSP का बजट बढ़कर 1 लाख 26 हजार हो गया है।



 किस फसल की MSP कितनी हुई 👇👇



 फसल MSP 2021-22 (रु. में) MSP 2022-23 (रु. में) MSP कितनी बढ़ी (रु. में)


 धान (सामान्य) 1940 2040 100


 धान (A ग्रेड) 1960 2060 100


 ज्वार (हाईब्रिड) 2738 2970 232


 ज्वार (मालदंडी) 2758 2990 232


 बाजरा 2250 2350 100


 रागी 3377 3578 201


 मक्का 1870 1962 92


 तुअर 6300 6600 300


 मूंग 7275 7755 480


 उड़द 6300 6300 300


 मूंगफली 5550 5850 300


 सूरजमुखी 6015 6400 385


 सोयाबीन 3950 4300 350


 तिल 7307 7830 523


 रामतिल 6930 7287 357


 कपास (मिडिल स्टेपल) 5726 6080 354


 कपास (लॉन्ग स्टेपल) 6025 6379 354



 बाजरे का MSP बढ़ाकर 2350 रुपए किया


 बाजरा पर MSP बढ़ाकर 2250 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2350 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। इसके अलावा सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3950 रुपए से बढ़ाकर 4300 रुपए किया गया है।



 खरीफ की फसलों में कौन-कौन सी फसलें आती हैं?


 धान (चावल), मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, मूंगफली, गन्ना, सोयाबीन, उडद, तुअर, कुल्थी, जूट, सन, कपास आदि। खरीफ की फसलें जून जुलाई में बोई जाती हैं। सितंबर-अक्टूबर में इनकी कटाई होती है।



 क्या है MSP या मिनिमम सपोर्ट प्राइज?


 MSP वह न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी गारंटेड मूल्य है जो किसानों को उनकी फसल पर मिलता है। भले ही बाजार में उस फसल की कीमतें कम हो। इसके पीछे तर्क यह है कि बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का किसानों पर असर न पड़े। उन्हें न्यूनतम कीमत मिलती रहे।



 सरकार हर फसल सीजन से पहले सीएसीपी यानी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस की सिफारिश पर एमएसपी तय करती है। यदि किसी फसल की बम्पर पैदावार हुई है तो उसकी बाजार में कीमतें कम होती है, तब MSP उनके लिए फिक्स एश्योर्ड प्राइज का काम करती है। यह एक तरह से कीमतों में गिरने पर किसानों को बचाने वाली बीमा पॉलिसी की तरह काम करती है।

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